मुझे हमेशा से ही पसंद थे लाल पीले रंग,
बारिश में भीगना, वो मिट्ठी की सौंधी महक
छोटे बच्चो से घंटों धींगा मस्ती करना..
उन्हें परेशान करना
जाड़ों की सर्द सुबहो में
पापा के साथ उनकी रजाई में दुबके पड़े रहना
गर्मियों की दोपहरी में औंधे पड़े कॉमिक्स पढना
अपनी गन्दी सी ड्राइंग पर इतराना
दोस्तों से ज़रा ज़रा सी बात पर नाराज़ हो जाना..
अपनी बात मनवाने के लिए सीरियस हो बड़े बड़े लोजिक देना.
और फिर थक हार कर खाने को मना कर देना
पकड़ा जाऊंगा ये जानते हुए भी माँ से झूट बोलना

सब कुछ मुझे भी बहुत पसंद था..
मगर पता ही नहीं चला की
इस जिंदगी की उधेड़बुन में
हम कब बड़े हो गए..
और..

दिल को सुकून देनी वाली वो तमाम बाते..
बचकानी हो गयी


© कमल किशोर जैन (16 सितम्बर 2013 )



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