मैं खता दर खता करता रहा,
वो मुस्कुरा कर माफ़ करते रहे..

मेरे तमाम ज़ुल्मो का
वो यूँ हिसाब करते रहे..

चले जाना था जिस दिन हमें उनकी ज़दों से इलाही
उसी रात वो सजदे में सर झुकाते चले गए..

माँगा तो हमने भी था उन्हें अपनी फरियादो में
वो जाने क्या क्या हम पर लुटाते चले गए.

सुना है वो अब भी गुम है मोहब्बत की उन हसीं यादो में
हम जिंदगी के रोजगार में खुद को भुला गए 
.
© कमल किशोर जैन (23 दिसंबर, 2015)

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कैसा लगा.. 
वो रात भला क्या रात हुई
जिस रात में तेरा जिक्र नहीं...

वो दिन भला क्योकर निकले
जिस दिन में तेरा संग नहीं..

उस धड़कन को क्या कहिये
जिस धड़कन में तेरा नाम नहीं..


उस पल की कीमत क्या होगी
जिस पल में तुम्हारा साथ नहीं,

वो जनम अकारथ ही बीते
जिस जनम में तेरा साथ नहीं..

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© कमल किशोर जैन (21 दिसंबर, 2015)
ये सरपट दौड़ती जिंदगी,
पीछे छूटते रिश्ते
आने वाले पड़ाव.
सब कुछ हर पल बदलता सा
जो नहीं बदला
वो तुम हो
जीवन में जहाँ थे
बस वहीँ हो..


(एक छोटी कविता)
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