क्यूँ घर भर का काज करे है वो

क्यूँ दुनिया भर से लाज करे है वो

क्यूँ खेल सके ना मन से वो,

क्यूँ सहन करे है सब कुछ वो


है वो भी भैया जैसी ही 

पर भैया सा प्यार नहीं मिलता

है इंसा वो भी उस जैसे ही

पर इंसा सा मान नहीं मिलता





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