कितना कुछ था हमारे दरमियाँ.. बेवजह सा
वो बेवजह तेरा हँसना.. वो बेवजह की मेरी नाराजगियां,
बेवजह ही होगा तेरा यूँ मेरे दिल में उतर जाना,
बेवजह ही तो था तेरा मुझमे सिमट जाना,

गर उस वक्त तेरे संग-ओ-साथ को कुछ मुकम्मल वजहे मिल जाती,
तो आज शायद यूँ बेवजह जीना नहीं पडता,
कुछ रिश्ते यूँ बेवजह निभाने नहीं पड़ते,
कुछ यादें यूँ बेवजह संजोनी नहीं पड़ती,

जाने क्यूँ उस प्यार को कभी कोई वजह ही ना मिल पाई,
या जाने यूँ बेवजह जीना ही जिंदगी बन गई..


- कमल किशोर जैन.13.6.2013
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