मैं अक्सर सोचा करता था की
खुशियाँ यूँ ही नहीं आती है... बेमकसद
ना ही कोई मुक्कमल तरीका है
हमेशा खुश रहने का
भले कोई लाख जतन कर ले
मगर हमेशा खुश रहना
किसी के बस की बात नहीं... किसी के
मगर मैं गलत था
यक़ीनन सौ फीसदी गलत
दरअसल बड़ा आसान है खुश रहना
उपरवाले ने छोटी छोटी चीजो में हमें
ये ख़ुशी की नियामत बख्शी है
मसलन कभी क्लास से बंक मारने की भी एक ख़ुशी है
दोस्तों के साथ घूमना, घंटो किताबे पढ़ना
गाने गुनगुनाना, फ़िल्में देखना
कभी "उनके" साथ होना, कभी "उनके" बिना होना
हर छोटी से छोटी बात में खुशियाँ छिपी होती है
कभी बच्चो की धींगा मस्ती में
तो कभी उनके बेवजह इतराने में भी
वो कभी माँ के हाथ की चपातियों में होती है
कभी मिटटी की सौंधी सी महक में
जिन यादों पर आंसू निकला करते थे
कभी उन्ही यादो में भी छिपी होती है ख़ुशी
ऐसी ही न जाने कितनी अनगिनत छोटी छोटी बातों में
छिपी होती है जीवन की खुशिया
ये तो बस हम ही है,
जो उन्हें ढूंढ नहीं पाते
और यूँ ही बेमतलब
दुखो को जीवन भर लादे फिरते है..

...बेमकसद

© कमल किशोर जैन (3 सितम्बर, 2013)





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