वहां जान उस मासूम की गयी,
इधर नेता एक नया तैयार हो गया,

अब उसकी लाश के भी सौदे होंगे,
सरे आम उछाली जायेगी उस मासूम की इज्जत

बेमौत मरी गयी उस निरीह को न्याय दिलाने के नाम पर
न जाने कितने बेगुनाहों को सताया जायेगा

खबरों की भूखी दुनिया को लंबे समय तक
अलग अलग मसालो के साथ परोसी जायेगी ये खबर भी

फिर चलेंगे आंदोलनों और श्रद्धान्जलियो के दौर
आखिर हर कोई क्यूँ नहीं चाहेगा, उसकी चिता पर अपनी रोटियां सेकना

आखिर इतनी आसानी से कहाँ मिलता है हर रोज कोई मुद्दा
और फिर यूँ तो नहीं बन जाता है कोई जन नेता

जाने पद के भूखे इन नेताओ को सत्ता के शीर्ष पर पहुँचाने के लिए
अभी और कितनी मासूमो को बलि पर चढाना होगा..


© कमल किशोर जैन (17 अगस्त 2013)

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