तुम कहती हो की तुम्हे मुझसे प्यार नहीं है..
ठीक ही होगा....

क्या हुआ जो मेरा दुःख तुम्हारी पलकें भिगो देता है,
क्या हुआ जो मेरी नाराजगी तुम्हे सताती है,

क्यूँ फरक पड़ता है तुमको रूठ जाने से मेरे ,
क्यूँ मेरी चिंता में पड़ते है पेशानी पर बल तेरे,

यूँ ही करती होंगी तुम फ़िक्र मेरी शामो-सहर,
यूँ ही बांटे होंगे मुझसे रंजो-गम अपने,

क्यूंकि हमेशा सच ही तो कहती हो तुम,
ये भी सच ही होगा की.... तुमको मुझसे प्यार नहीं.


शीर्षक
कैसा लगा.. 
0 Responses

Post a Comment