कमल किशोर जैन

एक दिन, ये मोगरे के सभी फूल झड़ जाएंगे 

एक दिन, धरती की ये सारी हरियाली खत्म हो जाएगी 


एक दिन, ये सभी सभ्यताएं नष्ट हो चुकी होगी 


एक दिन, इस धरती पर पानी की एक बूंद भी शेष नहीं बचेगी 


एक दिन, ये ग्रह सूर्य की परिक्रमा बंद कर उसमें समा जायेंगे 


एक दिन, ये धरती भी नष्ट प्राय होगी 


एक दिन, ये सूर्य भी अपनी ही आग में जलकर भस्म हो जाएगा 


एक दिन, ये अनंत ब्रह्मांड भी खुद में ही समा जाएगा 


उस एक आखरी पल में भी 


मेरा तुम्हारे लिए ये प्रेम ऐसे बना रहेगा 


अक्षुण्ण
, शाश्वत, अनंत और अथाह

...

© कमल किशोर जैन (21.09.2026)
0 Responses

Post a Comment