मुझे तुमसे करनी थी
कितनी कितनी बाते
हमारी तुम्हारी बाते
हमारे साथ की बाते
साथ बिताए हर पल की बाते
आने वाले कल की बाते
लेकिन हर गुजरते पल के साथ
ये वक्त जाने छिनता सा जा रहा है
हथेली से रेत की तरह फिसलता जा रहा है
जाने कितनी ही बाते, बिना किए बस खत्म हो रही है
वो बाते, जो कभी की जानी थी हमें साथ बैठकर
वो बाते, जो हमे हमेशा याद आनी थी
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जाना, मुझे तुमसे करनी थीं ना
कितनी कितनी बाते
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© कमल किशोर जैन (07.10.2026)


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