कमल किशोर जैन

उसने पूछा मुझसे, तुम्हे मोहब्बत से क्या हर्ज है 

मैने कहा, मुझे इश्क तो पसंद है, लेकिन बेहद 

 


जब मै कहूं, मुझे फूल पसंद है 


तो वो बगीचा बन जाए 



मै जब कहूँ, मुझे रंग पसंद है


वो इंद्रधनुष बन जाए



जब कहूँ, मुझे आग पसंद है


वो अपनी तपिश में मुझे जज्ब कर ले 



जब मै कहूं, मुझे तुम पसंद हो 


वो पूरी कायनात बन जाए 

 


जब मै रोने लगूं 


तो मेरे संग दरिया बन जाए 

 


जब मै उड़ना चाहूं, 


तो मेरे पंख बन जाए 

 


जब मै कदम बढ़ाऊं, 


वो रास्ता बन जाए 

 


जब मैं चुप रहूं 


तो हर एक लफ़्ज़ समझ जाए 

 


जब मै हंसने लगूं 


तो मेरा दर्द समझ जाए 

 


बस, मुझे ऐसा ही मोहब्बत पसंद है 


जो मुझसे पहले मुझे समझ जाए 



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© कमल किशोर जैन (09.08.2026)

 

 

 

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