Kamal K. Jain

और, एक दिन, जब तुम सब भूल जाओगी

मैं तुम्हे याद दिलाऊंगा

कैसे, मैने तुमसे प्यार किया, अथाह, अनंत, असीम

मैं याद दिलाऊंगा तुम्हे, हर वो लम्हा

जो हमने साथ मिल कर जिया 

हर वो राज जो तुमने मुझसे शाया किए 

तुम्हारे मन की हर वो गिरह, जो तुमने मेरे सामने खोली 

मै तुम्हे हर उस जगह साथ लेके चलूंगा, जिसका जिक्र कभी तुमने मुझसे किया होगा 

मै हर उस शख्स से तुम्हे रूबरू करवाऊंगा, जिससे कभी तुम्हारा राब्ता हुआ हो 

मै बताऊंगा तुम्हे, तुम्हे क्या पसंद है और क्या नहीं 

हर वो शय, जो तुम्हे खुशी दे, मै ले आऊंगा तुम्हारे खातिर 

हर वो बुरी याद, जो तुम्हे जख्म दे, उसे बहा आऊँगा दूर ब्रह्मपुत्र की धार में  

हर वो कड़वा अनुभव, जो तुमने जिया, मै नहीं आने दूंगा कभी 

फिर से तुम्हारी यादों में.. गलती से भी नहीं..  

नहीं, कभी नहीं 

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लेकिन, क्या हुआ, जो तुम मुझे ही भूल गई?





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© कमल किशोर जैन (28.10.2026)

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